
अजीत मिश्रा (खोजी)
🏥इलाज के नाम पर ‘कत्लगाह’ बना लाइफ लाइन हॉस्पिटल: मासूम की मौत, परिजनों की उम्मीदों का सौदा!🏥
🔔”बस्ती का लाइफ लाइन अस्पताल: जहाँ इलाज नहीं, मासूमों का सौदा होता है!”
🔔”साहब! कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग? लाइफ लाइन की लापरवाही ने उजाड़ी एक माँ की गोद।”
🔔”अस्पताल की ‘गोल्डी’ कर रही मामले को रफा-दफा करने की कोशिश, क्या पीड़ित को मिलेगा न्याय?”
🔔”नियमों की धज्जियां: बिना मास्क-ग्लव्स के NICU में मौत बाँट रहे कर्मचारी, प्रशासन मौन!”
ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
बस्ती। जनपद में निजी अस्पतालों की मनमानी और रसूख के आगे इंसानियत दम तोड़ रही है। ताजा मामला शहर के लाइफ लाइन हॉस्पिटल का है, जहाँ इलाज के नाम पर न केवल तीमारदारों की जेब काटी गई, बल्कि अस्पताल की घोर लापरवाही ने एक नवजात की जान ले ली। पैसे की हवस में अंधे अस्पताल प्रशासन ने मृतका के परिजनों को तब तक झांसे में रखा, जब तक कि बच्चा मौत के मुहाने पर नहीं पहुँच गया। अब मामले को दबाने के लिए अस्पताल के दलाल सक्रिय हो गए हैं।
💫सफेद कोट में छिपे ‘लुटेरे’: ₹4000 प्रतिदिन की अवैध वसूली
संतकबीरनगर के परसामाफी निवासी दिलीप और माधुरी ने अपने कलेजे के टुकड़े को बचाने के लिए लाइफ लाइन हॉस्पिटल पर भरोसा किया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यहाँ डॉक्टर नहीं, बल्कि ‘जल्लाद’ बैठे हैं। अस्पताल में सीपैप (CPAP) जैसी बुनियादी व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है, इसके बावजूद ऑक्सीजन के नाम पर 4000 रुपये प्रतिदिन की अवैध धनउगाही की गई। एक सप्ताह तक परिजनों को ‘सुधार’ का झांसा देकर लाखों रुपये की दवाएं मंगवाई गईं और जब पैसा खत्म होने लगा, तो साजिशन डिस्चार्ज का खेल खेला गया।
💫बिना मास्क-ग्लव्स के NICU में मौत बांट रहे कर्मचारी
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए परिजनों ने बताया कि जिस NICU में संक्रमण से बचाव के कड़े नियम होने चाहिए, वहाँ कर्मचारी बिना मास्क और ग्लव्स के घूमते हैं। जो कर्मचारी बीमारी ठीक करने के लिए रखे गए हैं, वही खुद संक्रमण फैलाकर मासूमों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
💫खेत गिरवी रखकर भरा अस्पताल का पेट, बदले में मिली लाश
पीड़ित पिता दिलीप ने रुंधे गले से बताया कि उन्होंने अपने बच्चे के इलाज के लिए अपना खेत गिरवी रख दिया था। अस्पताल ने 36,000 रुपये पहले जमा कराए और फिर 7,000 रुपये की अतिरिक्त मांग कर आनन-फानन में बच्चे को ‘स्वस्थ’ बताकर डिस्चार्ज कर दिया। घर पहुँचते ही बच्चे की स्थिति बिगड़ गई और 29 मार्च को उसने दम तोड़ दिया। लाइफ लाइन हॉस्पिटल ने न केवल एक मां की गोद सूनी की, बल्कि एक गरीब परिवार को कर्ज के बोझ तले दबा दिया।
💫गोल्डी नामक कर्मचारी का ‘मैनेजमेंट’ और अस्पताल की धमकी
बच्चे की मौत के बाद जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो अस्पताल की साख बचाने के लिए गोल्डी नामक एक कर्मचारी सक्रिय हो गई है। वह लगातार परिजनों पर फोन कर मामले को रफा-दफा करने और किसी भी कानूनी कार्यवाही न करने का दबाव बना रही है। सवाल यह उठता है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इन ‘मौत के सौदागरों’ पर खामोश क्यों है?
💫न्याय की गुहार: “हमें पैसा नहीं, कार्यवाही चाहिए”
पीड़ित परिवार अब किसी भी समझौते के मूड में नहीं है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
🔥लाइफ लाइन हॉस्पिटल का लाइसेंस तत्काल रद्द हो।
🔥लापरवाह कर्मचारियों और प्रबंधन पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
🔥धोखाधड़ी से वसूले गए पैसे वापस दिलाए जाएं।
संपादकीय टिप्पणी: लाइफ लाइन हॉस्पिटल के लिए लापरवाही और लूट का यह कोई पहला मामला नहीं है। अगर आज इन पर कठोर कार्यवाही नहीं हुई, तो कल फिर कोई गरीब अपना खेत गिरवी रखकर यहाँ अपनों की लाश ढोने को मजबूर होगा।




















